Riyasat IAS Mentorship Team
Updated 19 Jul 2026
26 min read
आज के विषय (Topics Covered Today) — 3
भारत की डिजिटल संप्रभुता — GS पेपर 3 (साइबर सुरक्षा, तकनीकी स्वायत्तता, आंतरिक सुरक्षा) एवं GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भू-राजनीति)
दक्षिण कोरिया का जनसांख्यिकीय संकट — GS पेपर 1 (जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे) एवं GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय)
प्रवासन का बदलता वैश्विक परिदृश्य — GS पेपर 1 (जनसंख्या, वैश्वीकरण) एवं GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, SDG)
विषय 1: भारत की डिजिटल संप्रभुता GS पेपर 3 │ साइबर सुरक्षा │ तकनीकी स्वायत्तता │ आंतरिक सुरक्षा │ GS पेपर 2 │ भू-राजनीति
चर्चा में क्यों? हाल ही में भारतीय CCTV नेटवर्क में चीनी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म ‘ईसीक्लाउड’ (ECCloud) के माध्यम से हैकिंग की कोशिशें सामने आईं, जिसका उद्देश्य रणनीतिक रक्षा संपत्तियों की जासूसी करना था। इसके अतिरिक्त, जुलाई 2025 में रूसी हिस्सेदारी के कारण अमेरिकी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्वारा यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को एकतरफा लागू करने से भारतीय कंपनी ‘नायरा एनर्जी’ को अपने ही क्लाउड डेटा और ईमेल से हाथ धोना पड़ा। ये घटनाएं भारत की तकनीकी स्वायत्तता पर बड़े सवाल खड़े करती हैं।
डिजिटल संप्रभुता: मुख्य चुनौतियाँ और राष्ट्रीय जोखिम
विदेशी निर्भरता और डेटा का दोहन: भले ही डेटा भारत में स्टोर हो, लेकिन विदेशी क्लाउड कंपनियां (माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेज़न) अपने देशों के कानूनों (उदा. अमेरिकी क्लाउड एक्ट) के तहत वह डेटा अपनी सरकारों को सौंपने के लिए बाध्य हो सकती हैं।
हार्डवेयर बनाम कोड (सॉफ्टवेयर-आधारित युद्ध): आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और रडार पूरी तरह सॉफ्टवेयर और कोड पर चलते हैं। यदि इनके सॉफ्टवेयर का नियंत्रण विदेशी निर्माताओं के हाथ में है, तो युद्ध की स्थिति में वे दूर बैठे-बैठे इनकी सटीकता कम कर सकते हैं या परिचालन ठप कर सकते हैं।
ऐतिहासिक सबक — कारगिल 1999: 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारत को अमेरिका द्वारा सटीक GPS सहायता देने से मना कर दिया गया था, जिससे पहाड़ी इलाकों में नेविगेशन में भारी दिक्कत आई थी।
एकतरफा भू-राजनीतिक प्रतिबंध: विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, किसी तीसरे देश के प्रतिबंधों का खामियाजा भारतीय कंपनियों को उठाना पड़ सकता है — जैसा नायरा एनर्जी के मामले में हुआ।
वैश्विक परिदृश्य: तकनीकी स्वायत्तता की ओर कदम
फ्रांस: 2027 तक सभी सरकारी विभागों को माइक्रोसॉफ्ट टीम्स और ज़ूम से हटाकर स्वदेशी वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म पर ले जाने की तैयारी।
यूरोपीय संघ, नीदरलैंड, डेनमार्क: माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस (Word, Excel) के घरेलू विकल्प तलाश रहे हैं और अपना ‘स्वतंत्र यूरोपीय क्लाउड’ विकसित कर रहे हैं।
भारत की नाजुक स्थिति और ‘सत्ता परिवर्तन सिद्धांत’
यह सिद्धांत कहता है कि जब कोई उभरती हुई शक्ति (जैसे भारत) रणनीतिक रूप से स्वायत्त रहते हुए किसी स्थापित महाशक्ति के करीब पहुँचती है, तो स्थापित महाशक्ति उसे रोकने या सीमित करने का प्रयास करती है। भारत के सामने चुनौती यह है कि उसे अपनी आर्थिक प्रगति को विदेशी प्रभाव से मुक्त रखते हुए आगे बढ़ाना है।
आगे की राह
क. स्वदेशी बुनियादी ढांचे का विस्तार
सफलता के उदाहरण: GPS की कमी के बाद भारत ने अपना NavIC (नाविक) बनाया। वित्तीय क्षेत्र में UPI और RuPay के जरिए विदेशी प्रणालियों (Visa/Mastercard) पर निर्भरता कम की।
भावी कदम: इसी तर्ज पर सरकारी मंत्रालयों में स्वदेशी ईमेल प्रणालियों (जैसे ज़ोहो – Zoho) और स्वदेशी क्लाउड स्टोरेज को अनिवार्य बनाना होगा।
ख. रक्षा उत्पादन के ‘अमेरिकी मॉडल’ को अपनाना
अब तक भारत रक्षा उत्पादन के लिए केवल सार्वजनिक क्षेत्र (PSUs) पर निर्भर रहा है, जिससे परिणाम धीमे रहे हैं।
सुझाव: अमेरिका की तरह, सरकार को निजी क्षेत्र को अनुसंधान फंड और निश्चित खरीद की गारंटी देनी चाहिए। भारत ने ‘उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान’ (AMCA) के विकास में निजी भागीदारी को आमंत्रित कर इसकी शुरुआत कर दी है।
ग. रणनीतिक साझेदारी और पारस्परिक निर्भरता
चीन की तरह पूरी तरह अलग-थलग होने के बजाय भारत को अन्य देशों के साथ मिलकर तकनीक विकसित करनी चाहिए, ताकि एकतरफा प्रतिबंधों का खतरा न रहे।
उदाहरण: भारत-रूस का ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम।
हालिया प्रगति: गुजरात के सानंद में अमेरिकी सहयोग से माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर सुविधा का शुरू होना और अमेरिका के नेतृत्व वाली ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) पहल में भारत का शामिल होना।
घ. R&D व्यय का अंतर पाटना
पैमाना
भारत की स्थिति
वैश्विक औसत
R&D व्यय (GDP का %)
0.74% (वर्ष 2000-2020 का औसत)
2.07%
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह विषय GS पेपर 3 (साइबर सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, रक्षा उत्पादन) को GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत की विदेश नीति, भू-राजनीति) से जोड़ता है। NavIC, UPI/RuPay, ब्रह्मोस और AMCA — ये सभी तकनीकी स्वायत्तता के ठोस उदाहरण हैं जो किसी भी संबंधित उत्तर में उद्धृत किए जा सकते हैं।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा)“बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच, किसी राष्ट्र की डिजिटल अवसंरचना पर विदेशी नियंत्रण उसकी संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।” इस कथन के आलोक में, भारत के सामने मौजूद चुनौतियों की चर्चा कीजिए तथा देश की डिजिटल संप्रभुता को सुरक्षित करने के उपायों के सुझाव दीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ)भारत की डिजिटल संप्रभुता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ‘अमेरिकी क्लाउड एक्ट’ के तहत, अमेरिकी क्लाउड कंपनियां अपने सर्वर पर संग्रहीत विदेशी नागरिकों का डेटा अमेरिकी सरकार को सौंपने के लिए बाध्य हो सकती हैं, चाहे वह डेटा किसी भी देश में संग्रहीत हो। 2. ‘सत्ता परिवर्तन सिद्धांत’ (Power Transition Theory) के अनुसार, जब कोई उभरती शक्ति स्थापित महाशक्ति के करीब पहुँचती है, तो स्थापित महाशक्ति उसे सीमित करने का प्रयास करती है। 3. NavIC (नाविक) भारत का स्वदेशी क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है, जिसे GPS पर निर्भरता कम करने के लिए विकसित किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (D) 1, 2 और 3 — तीनों कथन सही हैं। अमेरिकी क्लाउड एक्ट विदेशी डेटा तक अमेरिकी पहुंच की अनुमति देता है; ‘सत्ता परिवर्तन सिद्धांत’ भारत की भू-राजनीतिक चुनौतियों को समझाने का एक प्रमुख ढांचा है; और NavIC को 1999 के कारगिल युद्ध में GPS की अनुपलब्धता के बाद विकसित किया गया था।
विषय 2: दक्षिण कोरिया का जनसांख्यिकीय संकट GS पेपर 1 │ जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे │ GS पेपर 2 │ सामाजिक न्याय │ भारत के लिए सबक
चर्चा में क्यों? संयुक्त राष्ट्र (UN) के हालिया अनुमानों के अनुसार, दक्षिण कोरिया की जनसंख्या में तीव्र गिरावट आने की आशंका है। यदि वर्तमान रुझान जारी रहा, तो अगले छह दशकों में (वर्ष 2100 तक) देश की जनसंख्या वर्तमान के 52 मिलियन से घटकर केवल 22 मिलियन (लगभग 42%) रह जाएगी। यह संकट दुनिया भर के विकसित और उभरते समाजों के लिए एक चेतावनी है।
जनसांख्यिकीय गिरावट के प्रमुख कारक
किसी भी देश की जनसंख्या मुख्यतः तीन मापदंडों पर निर्भर करती है: प्रजनन दर (Fertility Rate), जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy), और शुद्ध प्रवासन (Net Migration):
प्रजनन दर में ऐतिहासिक गिरावट: 1960 के दशक में दक्षिण कोरिया में प्रति महिला औसत प्रजनन दर 6 थी, जो वर्तमान में गिरकर मात्र 0.75 रह गई है — यह जनसंख्या प्रतिस्थापन दर (2.1) से बहुत नीचे है।
शुद्ध प्रवासन: दक्षिण कोरिया की वर्तमान शुद्ध प्रवासन दर प्रति वर्ष प्रति 1,000 निवासियों पर मात्र 1.3 व्यक्ति है — वैश्विक स्तर पर सबसे कम दरों में से एक।
वृद्ध होती जनसंख्या: जीवन प्रत्याशा में सुधार तो हुआ है, लेकिन जन्म दर में कमी के कारण ‘कार्यशील जनसंख्या’ सिकुड़ रही है और आश्रित बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है।
जनसंख्या स्थिरता के तीन संभावित परिदृश्य
‘आवर वर्ल्ड इन डेटा’ के जनसंख्या मॉडल के अनुसार, यदि दक्षिण कोरिया को अपनी जनसंख्या स्थिर रखनी है, तो निम्नलिखित में से किसी एक मार्ग को अपनाना होगा:
परिदृश्य
आवश्यकता
व्यावहारिकता
अ: प्रजनन दर में भारी वृद्धि
प्रजनन दर को 0.75 से बढ़ाकर 2050 तक 2.1 (प्रतिस्थापन स्तर) पर लाना होगा
अभूतपूर्व ‘बेबी बूम’ की आवश्यकता — ऐतिहासिक रूप से अत्यंत दुर्लभ। केवल मामूली सुधार गिरावट को धीमा कर सकता है, रोक नहीं सकता।
ब: जीवन प्रत्याशा में अवास्तविक वृद्धि
2050 तक औसत जीवन प्रत्याशा ~83 वर्ष से बढ़ाकर 130 वर्ष करना होगा
सामान्य गति से 47 वर्षों की वृद्धि के लिए लगभग 188 वर्ष लगेंगे — वैज्ञानिक रूप से फिलहाल असंभव।
स: प्रवासन में आक्रामक सुधार
शुद्ध प्रवासन दर को बढ़ाकर प्रति 1,000 लोगों पर 9 आप्रवासी करना होगा
यह वर्तमान दर (1.3) से लगभग 7 गुना अधिक — इसके लिए रूढ़िवादी सामाजिक-सांस्कृतिक नीतियों में व्यापक बदलाव जरूरी।
आगे की राह: मिश्रित दृष्टिकोण
प्रजनन दर को 2.3 तक ले जाना: व्यापक सामाजिक-आर्थिक सहायता (बाल देखभाल भत्ते, कार्य-जीवन संतुलन, लैंगिक समानता) के माध्यम से प्रजनन दर को 2.3 तक बढ़ाना और स्थिर रखना सबसे व्यावहारिक समाधान है।
प्रवासन नीतियों का उदारीकरण: विदेशी पेशेवरों और कार्यबल को आकर्षित करने के लिए नागरिकता और वीजा नियमों को सुलभ बनाना होगा।
भारत के लिए सबक
जनसांख्यिकीय लाभांश का समय रहते उपयोग: यह मामला दिखाता है कि यदि जनसांख्यिकीय लाभांश का सही उपयोग न किया जाए और जन्म दर अत्यधिक गिर जाए, तो देश ‘समृद्ध होने से पहले ही बूढ़ा’ (Aging before becoming rich) हो सकता है।
भारत के कुछ राज्यों में संकेत: केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रजनन दर पहले से ही प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे जा चुकी है। भारत को भविष्य के नियोजन के लिए दक्षिण कोरिया के इस संकट से सीख लेनी चाहिए।
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह विषय GS पेपर 1 (जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे, जनसांख्यिकीय परिवर्तन) को GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय, कल्याण नीतियां) से जोड़ता है। ‘Aging before becoming rich’ की अवधारणा और तीन-मार्गी विश्लेषण का ढांचा भारत की जनसंख्या नीति से जुड़े किसी भी उत्तर में उद्धृत करने योग्य है।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा)दक्षिण कोरिया का जनसांख्यिकीय संकट वैश्विक उत्तर के लिए एक दर्पण है। इस संकट के प्रमुख कारकों की विवेचना कीजिए और उन नीतिगत सबकों की चर्चा कीजिए जो भारत को अपने जनसांख्यिकीय भविष्य की योजना बनाने में मदद कर सकते हैं। (15 अंक, 250 शब्द)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ)दक्षिण कोरिया की जनसांख्यिकीय स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी देश में ‘जनसंख्या प्रतिस्थापन दर’ (Replacement Level Fertility) प्रति महिला 2.1 बच्चों की प्रजनन दर को संदर्भित करती है। 2. दक्षिण कोरिया की वर्तमान प्रजनन दर जनसंख्या प्रतिस्थापन दर से काफी ऊपर है। 3. भारत के केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्रजनन दर पहले से ही प्रतिस्थापन स्तर से नीचे आ चुकी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 3 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (A) केवल 1 और 3 — कथन 2 गलत है: दक्षिण कोरिया की वर्तमान प्रजनन दर मात्र 0.75 है, जो प्रतिस्थापन दर 2.1 से बहुत नीचे है — न कि ऊपर। कथन 1 (प्रतिस्थापन दर की परिभाषा) और कथन 3 (केरल-तमिलनाडु की स्थिति) दोनों सही हैं।
विषय 3: प्रवासन का बदलता वैश्विक परिदृश्य GS पेपर 1 │ जनसंख्या │ वैश्वीकरण │ GS पेपर 2 │ अंतर्राष्ट्रीय संबंध │ SDG 10.7
चर्चा में क्यों? आज से ठीक 100 वर्ष पहले (23 जून 1926 को) लंदन के होल्बोर्न रेस्तरां में प्रथम ‘विश्व प्रवासन सम्मेलन’ का आयोजन किया गया था। श्रम इतिहास में यह पहली बार था जब किसी वैश्विक सम्मेलन का एकमात्र विषय ‘प्रवासन’ था। 2026 में वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट के नवीनतम आंकड़ों के साथ इस ऐतिहासिक मील के पत्थर की शताब्दी एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक विश्लेषण का अवसर प्रदान करती है।
ऐतिहासिक परिदृश्य: 1926 का सम्मेलन
नीतिगत प्रतिबंध और गिरावट: 1926 के सम्मेलन में रेखांकित किया गया था कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए सख्त आप्रवासन प्रतिबंधों के कारण यूरोप से प्रवासियों की संख्या में भारी गिरावट आई थी — 1913 से पहले के 5 वर्षों में 7 मिलियन से 1924 तक 3.5 मिलियन से भी कम।
क्षेत्रीय रुझान: उस दौर में एशिया में चीनी आबादी का मूक प्रवेश और अफ्रीका में खनन व कृषि केंद्रों की ओर स्थानीय निवासियों का पलायन प्रमुख भू-राजनीतिक चिंताएं थीं।
वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026: नवीनतम आंकड़े
प्रवासियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि: वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार आज दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की कुल संख्या 285+ मिलियन को पार कर चुकी है, जो वैश्विक आबादी का लगभग 3.6% है।
प्रेषण का नया रिकॉर्ड: वैश्विक स्तर पर प्रवासियों द्वारा अपने गृह देशों में भेजा जाने वाला धन अब 870+ बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है — कई विकासशील देशों की GDP का मुख्य आधार।
भारत की वैश्विक स्थिति: रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत दुनिया में सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता देश बना हुआ है। साथ ही भारत अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत भी है — खाड़ी देशों, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में भारतीय नागरिक महत्वपूर्ण कार्यबल का हिस्सा हैं।
प्रवासन के आधुनिक कारक: 1926 में प्रवासन मुख्य रूप से आर्थिक और औपनिवेशिक नीतियों से प्रेरित था, जबकि 2026 में जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक संघर्ष (यूक्रेन, मध्य पूर्व संकट) और तकनीकी कौशल प्रमुख कारक बन गए हैं।
100 वर्षों का तुलनात्मक विश्लेषण
आयाम
विश्व प्रवासन सम्मेलन (1926)
वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट (2026)
मुख्य प्रेरक (Drivers)
औपनिवेशिक श्रम, कृषि, और औद्योगिक खनन (Mining)
डिजिटल अर्थव्यवस्था, तकनीकी कौशल, युद्ध/शरणार्थी संकट और जलवायु परिवर्तन
प्रवासन का प्रवाह
मुख्य रूप से यूरोप से बाहर की ओर (Transatlantic) और क्षेत्रीय अफ्रीकी/एशियाई प्रवासन
मुख्य रूप से विकासशील देशों (Global South) से विकसित देशों (Global North) की ओर
वैश्विक दृष्टिकोण
देशों द्वारा संप्रभु सुरक्षा के नाम पर प्रतिबंधात्मक नीतियां (Protectionism)
वैश्विक कार्यबल की कमी (जापान, द. कोरिया, यूरोप) के कारण विनियमित प्रवासन (Regulated Migration) की आवश्यकता
भारत के लिए निहितार्थ: प्रवासी कूटनीति
1926 के सम्मेलन ने जिस प्रवासन को केवल ‘श्रम और प्रतिबंधों’ के चश्मे से देखा था, 2026 तक वह वैश्विक अर्थव्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। सतत विकास लक्ष्य (SDG 10.7) भी सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार प्रवासन की वकालत करता है।
प्रवासी कूटनीति को मजबूत करना: वैश्विक मंचों पर प्रवासियों के अधिकारों, सुरक्षा और न्यूनतम प्रेषण शुल्क को सुनिश्चित करने के लिए भारत को अपनी ‘प्रवासी कूटनीति’ को और सशक्त बनाना होगा।
प्रेषण का रणनीतिक उपयोग: 870+ बिलियन डॉलर वैश्विक प्रेषण में भारत की हिस्सेदारी को न केवल सुरक्षित करना, बल्कि इसे कौशल विकास और निवेश की ओर मोड़ना एक महत्वपूर्ण नीतिगत अवसर है।
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह विषय GS पेपर 1 (वैश्वीकरण, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे) को GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, SDG, भारतीय डायस्पोरा) से जोड़ता है। 100-वर्षीय तुलनात्मक ढांचा और भारत की ‘सबसे बड़े प्रेषण प्राप्तकर्ता’ की स्थिति परीक्षोपयोगी तथ्य हैं।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा)“100 वर्षों में वैश्विक प्रवासन — ‘श्रम प्रतिबंधों’ के युग से ‘विनियमित वैश्विक गतिशीलता’ के युग तक एक संरचनात्मक बदलाव आया है।” 1926 के विश्व प्रवासन सम्मेलन और वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए तथा भारत की प्रवासी कूटनीति के लिए इसके निहितार्थों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ)वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 और वैश्विक प्रवासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की वर्तमान संख्या 285+ मिलियन है, जो वैश्विक जनसंख्या का लगभग 3.6% है। 2. भारत वर्तमान में विश्व का सबसे बड़ा प्रेषण (Remittance) प्राप्तकर्ता देश है। 3. सतत विकास लक्ष्य 10.7 (SDG 10.7) सुरक्षित, व्यवस्थित और जिम्मेदार प्रवासन की वकालत करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2 (B) केवल 2 और 3 (C) केवल 1 और 3 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (D) 1, 2 और 3 — तीनों कथन सही हैं। वर्ल्ड माइग्रेशन रिपोर्ट 2026 के अनुसार 285+ मिलियन अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी (वैश्विक जनसंख्या का ~3.6%); भारत सबसे बड़ा प्रेषण प्राप्तकर्ता (870+ बिलियन डॉलर वैश्विक प्रेषण में भारत की प्रमुख हिस्सेदारी); और SDG 10.7 सुरक्षित एवं व्यवस्थित प्रवासन को प्रोत्साहित करता है।
रियासत IAS मेंटरशिप — UPSC CSE के लिए स्मार्ट तैयारी करें रियासत अली सर से सीधा मार्गदर्शन │ हिंदी और अंग्रेजी माध्यम │ 100% ऑनलाइन → Apply at iasmentorship.com/admissions