गठबंधन राजनीति, लोकतांत्रिक प्रतिरोध और भारतीय लोकतंत्र का भविष्य
GS Paper 2 | राजव्यवस्था | शासन | राजनीतिक दल | नागरिक समाज
| ⚡ चर्चा में क्यों? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष की भूमिका और गठबंधन का भविष्य केवल चुनावी अंकगणित से आगे जाकर विविधता की रक्षा का माध्यम बन गया है। किसानों, मज़दूरों और छात्रों के जन-आंदोलनों ने सिद्ध किया है कि जीवंत लोकतंत्र में “सकारात्मक प्रतिरोध” नीतियों को जन-आकांक्षी बनाने और सत्ता को जवाबदेह रखने का सबसे सशक्त उपकरण है। |
ऐतिहासिक संदर्भ: स्वतंत्रता संग्राम और “पूर्ण स्वराज” की विरासत
| घटना | विवरण |
| विचार की उत्पत्ति | 1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में दो साम्यवादी प्रतिनिधियों — मौलाना हसरत मोहानी और स्वामी कुमारानंद — ने पहली बार “पूर्ण स्वराज” का विचार रखा |
| आधिकारिक लक्ष्य | 1927 के मद्रास अधिवेशन में प्रस्तुत; 1929 के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस का आधिकारिक लक्ष्य घोषित |
| विविध विचारधाराओं का संगम | स्वतंत्रता संग्राम किसी एक दल का एकाधिकार नहीं — वामपंथी, समाजवादी और फुले-अंबेडकर-पेरियार विचारधाराओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर योगदान दिया |
समकालीन चुनौतियाँ: अधिनायकवाद बनाम लोकतांत्रिक संस्थाएँ
- “एक राष्ट्र, एक दल” की नीति क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करती है
- दलबदल की राजनीति: फासीवादी और सर्वसत्तावादी आक्रमण के सामने कोई भी दल सुरक्षित नहीं — दलबदल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण
- संस्थागत क्षरण: चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल और “बुलडोजर संस्कृति” का ज़मीनी स्तर पर कानून के शासन पर हावी होना — दोनों चिंता का विषय
लोकतंत्र में “प्रतिरोध” की भूमिका और जन-आंदोलन
| आंदोलन | परिणाम / महत्व |
| 2014 का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश विरोधी आंदोलन | सरकार ने विवादास्पद अध्यादेश वापस लिया — किसान सहमति को कमज़ोर करने वाले प्रावधान हटाए गए |
| ऐतिहासिक किसान आंदोलन (2020-21) | तीनों कृषि कानूनों की वापसी (नवंबर 2021) — आधुनिक भारत का सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत पलटाव |
| CAA के विरुद्ध नागरिक अधिकार आंदोलन (2019-20) | संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिक समाज की तत्परता का प्रदर्शन |
| छात्र और श्रमिक आंदोलन | AISA, SFI जैसे वामपंथी छात्र संगठन और CJP जैसे डिजिटल मंच जवाबदेही तय करने का काम कर रहे हैं |
आगे की राह: गठबंधन शासन के लिए
- विविधता में एकता: INDIA गठबंधन 23 विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों का समूह है — बड़े दल छोटे क्षेत्रीय दलों की वैचारिक पहचान का सम्मान करें
- जमीनी संघर्षों से जुड़ाव: केवल चुनावी समन्वय पर्याप्त नहीं — किसानों, मज़दूरों और छात्रों की वास्तविक समस्याओं से जुड़कर सार्वजनिक निराशा को रचनात्मक राजनीतिक विकल्प में बदलना होगा
- नेतृत्व की दोहरी भूमिका: नेताओं पर अपनी पार्टी को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ गठबंधन के भीतर विश्वास और सामंजस्य की संस्कृति विकसित करने की जिम्मेदारी
- चुनावी झटकों से सीख: महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली के झटकों के बाद गठबंधन को केवल चुनावी अंकगणित के बजाय साझा सकारात्मक एजेंडे के साथ जनता के बीच जाना होगा
| 📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न “संसदीय लोकतंत्र की जीवंतता के लिए एक मजबूत और एकजुट विपक्ष का होना अनिवार्य है।” भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों के बदलते स्वरूप और समकालीन चुनौतियों के आलोक में इस कथन की समीक्षा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) |


