UPSC Prelims Current Affairs

लू (Heatwaves) और सतही ओज़ोन

Riyasat IAS Mentorship Team Updated 19 Jul 2026 6 min read

लू (Heatwaves) और सतही ओज़ोन

GS Paper 3 | पर्यावरण | वायु प्रदूषण | सार्वजनिक स्वास्थ्य | जलवायु परिवर्तन

चर्चा में क्यों? जर्नल npj Clean Air में प्रकाशित एक हालिया सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन में भारत में बढ़ रहे एक गंभीर “साइलेंट किलर” की ओर इशारा किया गया है। लू के थपेड़े न सिर्फ तापमान बढ़ाते हैं, बल्कि हवा में एक ज़हरीले प्रदूषक — सतही ओज़ोन — की मात्रा को भी खतरनाक स्तर तक ले जाते हैं, जिससे दिल और फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है।

मुख्य आंकड़े एक नज़र में

डेटा बिंदुआंकड़ा / निष्कर्ष
WHO सुरक्षित ओज़ोन सीमा70 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³)
लू के दौरान उत्तर भारत में ओज़ोन स्तर85-110 µg/m³ (सुरक्षित सीमा से 21-57% अधिक)
2024 की लू में ओज़ोन से जुड़ी मौतें~26,500 (इस्केमिक हृदय रोग + COPD)
अत्यधिक लू तीव्रता से अतिरिक्त मौतें~830 (490 हृदय रोग + 342 COPD)
सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रपश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (पिछले 20 वर्षों में सबसे तीव्र वृद्धि)
अध्ययन की अवधि20 वर्षों में 188 लू की घटनाओं का विश्लेषण
सर्वाधिक भीषण ओज़ोन संकट के वर्ष2010, 2016, 2019 और 2024 — सभी अल-नीनो प्रभाव वाले वर्ष

सतही ओज़ोन क्या है?

ओज़ोन प्रकारस्थानभूमिका
समतापमंडलीय ओज़ोन (Stratospheric)पृथ्वी से 15-35 किमी ऊपर (ओज़ोन परत)सुरक्षात्मक — UV-B विकिरण अवशोषित करती है
सतही / क्षोभमंडलीय ओज़ोन (Tropospheric)ज़मीनी स्तर (0-2 किमी)हानिकारक — ज़हरीला द्वितीयक प्रदूषक; हृदय और फेफड़ों को नुकसान

निर्माण प्रक्रिया: सतही ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है — यह सीधे गाड़ियों या कारखानों की चिमनियों से नहीं निकलती। यह तब बनती है जब प्राथमिक प्रदूषक जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs जैसे फॉर्मेल्डिहाइड) तेज धूप और उच्च तापमान की उपस्थिति में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।

नीतिगत चुनौतियाँ और आगे की राह

चुनौतीआवश्यक नीतिगत प्रतिक्रिया
ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन निगरानी तंत्र का अभावNCAP (राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम) के तहत सभी Tier-1 और Tier-2 शहरों में निरंतर ओज़ोन निगरानी केंद्र अनिवार्य किए जाएं
हीट एक्शन प्लान में वायु गुणवत्ता का अभावNDMA और राज्य सरकारें Heat Action Plans में सतही ओज़ोन मापदंड शामिल करें — लू को केवल थर्मल संकट के रूप में न देखें
ओज़ोन-पूर्ववर्ती गैसों का उत्सर्जनBS-VI नियमों का कड़ा प्रवर्तन और औद्योगिक VOC नियमन — लक्षण नहीं, कारण पर ध्यान दें
जलवायु-प्रदूषण का संयुक्त जोखिमभारत के जलवायु अनुकूलन ढांचे में बढ़ते तापमान और खराब वायु गुणवत्ता के संयुक्त स्वास्थ्य जोखिम को स्वीकार किया जाए
📌 UPSC नोट नोट: जलवायु परिवर्तन केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है; यह वायु प्रदूषण की रासायनिक संरचना को बदलकर जनस्वास्थ्य के संकट को कई गुना बढ़ा रहा है। नीति निर्माताओं को अब “हीट एक्शन प्लान” बनाते समय वायु गुणवत्ता को भी उसमें शामिल करना होगा।
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न “भारत में लू (Heatwaves) की बढ़ती आवृत्ति न केवल एक थर्मल संकट है, बल्कि यह वायु रासायनिक परिवर्तनों के माध्यम से स्वास्थ्य के खतरों को भी बढ़ा रही है।” हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और इसके शमन के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न सतही ओज़ोन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सतही ओज़ोन एक प्राथमिक प्रदूषक है जो वाहनों और कारखानों से सीधे उत्सर्जित होती है। 2. सतही ओज़ोन का निर्माण NO₂ और VOCs के तेज धूप तथा उच्च तापमान की उपस्थिति में रासायनिक प्रतिक्रिया से होता है। 3. समतापमंडलीय ओज़ोन और सतही ओज़ोन दोनों मानव स्वास्थ्य के लिए समान रूप से हानिकारक हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1   (B) केवल 2   (C) 2 और 3   (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (B) केवल 2 — कथन 1 गलत है: सतही ओज़ोन द्वितीयक प्रदूषक है, प्राथमिक नहीं। कथन 3 गलत है: समतापमंडलीय ओज़ोन UV-B से सुरक्षा करती है (लाभदायक), जबकि सतही ओज़ोन हृदय और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है (हानिकारक)।

Other Courses

  • Mentorship

    UPSC Mentorship Program

    End-to-end 1:1 mentorship across Prelims, Mains and the interview — a study plan set with a mentor and reviewed as your preparation moves.

  • Mains

    Mains Secure

    Answer writing with mentor feedback on your copies — structure, content depth and presentation reviewed against the GS papers you are writing for.

  • Foundation

    GS Foundation Mentorship

    Syllabus-mapped General Studies coverage with 1:1 mentorship, so daily reading turns into notes you can revise and answers you can write.

Not sure which one fits? Talk it through with a mentor: +91 80905 28260

Call WhatsApp Enquiry