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राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य: 7 गंभीर खतरे और सुप्रीम कोर्ट का निर्णायक हस्तक्षेप | Riyasat IAS Mentorship

Riyasat IAS Mentorship Team Updated 19 Jul 2026 10 min read

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य चर्चा में क्यों है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत खनन पर स्वतः संज्ञान लिया है। न्यायालय ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को चेतावनी दी है कि यदि 11 मई 2026 तक ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वहां अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा सकती है। UPSC 2026 अभ्यर्थियों के लिए यह विषय Riyasat IAS Mentorship के साथ तैयारी का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। रोज़ाना की करेंट अफेयर्स अपडेट्स के लिए देखें करेंट अफेयर्स पेज.

कोर्ट ने राज्यों के “असहाय होने” के तर्क को खारिज करते हुए इसे ‘संस्थागत इच्छाशक्ति की कमी’ बताया। यह मुद्दा पर्यावरण शासन और विकास के बीच संतुलन के UPSC Mains GS-III विषयों से सीधे जुड़ा है, जिसे हमारे फाउंडेशन मेंटरशिप (हिंदी) पाठ्यक्रम में विस्तार से कवर किया जाता है।

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य — UPSC प्रीलिम्स हेतु मुख्य तथ्य

प्रीलिम्स में पूछे जाने योग्य स्थिर और गतिशील तथ्य निम्नलिखित तालिका में संक्षेप में दिए गए हैं:

मापदंडविवरण
अवस्थितिराजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रि-जंक्शन पर चंबल नदी के साथ
स्थापना वर्ष1979 (नदी अभयारण्य के रूप में)
प्रमुख प्रजातिघड़ियाल (IUCN — क्रिटिकली एंडेंजर्ड)
अन्य प्रमुख प्रजातियाँलाल मुकुट वाला कछुआ, गंगा डॉल्फिन, भारतीय स्किमर
पारिस्थितिक महत्वउत्तर भारत की सबसे कम प्रदूषित नदियों में से एक
प्रमुख खतराअवैध रेत खनन, अवैध शिकार, अवैध मछली पकड़ना
संबंधित कानूनवन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972; MMDR अधिनियम, 1957
सहायक नदीचंबल यमुना की सहायक नदी है

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के समक्ष 7 गंभीर खतरे

1. बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन

संगठित माफिया रेत को प्राकृतिक पुनःपूर्ति दर से कहीं अधिक तेज़ी से निकाल रहे हैं, जिससे घड़ियालों के घोंसले नष्ट हो रहे हैं। रेत को MMDR अधिनियम, 1957 की धारा 3(e) के तहत ‘गौण खनिज’ माना गया है। हमारे Secure Prelims Program 2026 में इस विषय को तथ्यात्मक रूप से कवर किया गया है।

2. प्रशासनिक उदासीनता और संस्थागत विफलता

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के “मारक क्षमता” वाले तर्क को अस्वीकार कर दिया। यह शासन विफलता UPSC Mains GS-II एवं GS-III उत्तरों में बार-बार आने वाला विषय है।

3. वनरक्षकों की हत्याएँ

हरिकेश गुर्जर और जितेंद्र सिंह शेखावत जैसे वनरक्षकों की हत्याओं से स्पष्ट है कि अवैध खनन अब केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था का संकट बन चुका है।

4. घड़ियाल संरक्षण पर खतरा

घड़ियाल (Gavialis gangeticus) ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ हैं और चंबल में विश्व की सबसे बड़ी प्रजनन आबादी निवास करती है। ऐसे संरक्षण विषयों के रिवीज़न के लिए देखें YATHARTH ऑल इंडिया मॉक प्रीलिम्स.

5. गंगा डॉल्फिन की घटती संख्या

भारत की राष्ट्रीय जलीय प्राणी गंगा डॉल्फिन ड्रेजिंग से होने वाली गंदगी के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। खनन से डॉल्फिन की उपस्थिति निरंतर घट रही है।

6. हाइड्रोलॉजी में परिवर्तन

अत्यधिक खनन नदी के रूप को बदलता है, किनारों के कटाव को बढ़ाता है और भूजल पुनर्भरण को बाधित करता है — यह पर्यावरण और आपदा प्रबंधन दोनों विषयों से जुड़ा है।

7. अंतर-राज्यीय प्रवर्तन चुनौतियाँ

क्योंकि यह अभयारण्य तीन राज्यों में फैला है, समन्वित प्रवर्तन कमज़ोर है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘संयुक्त गश्ती दल’ गठित करने का निर्देश दिया है। ऐसे सहकारी संघवाद विषय हमारे UPSC मेंटरशिप कार्यक्रम में कवर किए जाते हैं।

चंबल अभयारण्य — रेत खनन से संबंधित विधिक ढाँचा

प्रावधानमुख्य विषय-वस्तु
MMDR अधिनियम — धारा 15राज्य सरकारों को खनन के नियम बनाने का अधिकार
MMDR अधिनियम — धारा 21अवैध खनन पर 5 वर्ष तक की जेल एवं भारी जुर्माना
MMDR अधिनियम — धारा 23Cराज्यों को अवैध खनन-परिवहन रोकने के कठोर नियम
धारणीय रेत खनन दिशानिर्देश, 2020जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (DSR), GPS, CCTV अनिवार्य
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972अनुसूचित प्रजातियों को संरक्षण
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986अनिवार्य पर्यावरणीय मंजूरी (EC)

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश — प्रस्तावित प्रवर्तन ढाँचा

श्रेणीप्रस्तावित उपाय
तकनीकी निगरानीहाई-रेजॉल्यूशन Wi-Fi CCTV; SP/DFO कार्यालयों को लाइव फीड
ट्रैकिंगखनन वाहनों में GPS (पायलट परियोजना)
प्रवर्तनवाहनों/मशीनरी की तत्काल जब्ती; त्वरित सुनवाई
अंतर-राज्य समन्वयअंतर-राज्यीय सीमाओं पर संयुक्त गश्ती दल
अंतिम उपायअर्धसैनिक बलों की तैनाती

UPSC प्रासंगिकता — राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य

प्रीलिम्स के लिए:

  • राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की अवस्थिति एवं त्रि-जंक्शन राज्य
  • प्रमुख प्रजातियाँ: घड़ियाल, लाल मुकुट कछुआ, गंगा डॉल्फिन
  • रेत का MMDR अधिनियम, 1957 के अंतर्गत ‘गौण खनिज’ वर्गीकरण
  • धारणीय रेत खनन दिशानिर्देश, 2020 — DSR की अनिवार्यता
  • घड़ियाल की IUCN स्थिति — Critically Endangered

मेन्स के लिए (GS पेपर III — पर्यावरण एवं GS पेपर II — शासन):

  • पर्यावरण संरक्षण बनाम आर्थिक विकास में न्यायपालिका की भूमिका
  • वन्यजीव संरक्षण में अंतर-राज्यीय सहयोग
  • अवैध खनन — संगठित अपराध और पारिस्थितिक प्रभाव
  • हिंदी माध्यम में गहन तैयारी के लिए देखें Prelims Hindi कार्यक्रम और Prelims English कार्यक्रम.
अभ्यास प्रश्न (GS पेपर III, 250 शब्द / 15 अंक) “पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाने में न्यायपालिका की भूमिका तेज़ी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन के संदर्भ में चर्चा कीजिए।”

निष्कर्ष

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य का संकट यह दर्शाता है कि भारत में पर्यावरण संरक्षण अब कानूनी ढाँचे से अधिक संस्थागत इच्छाशक्ति पर निर्भर है। Riyasat IAS Mentorship के साथ तैयारी कर रहे अभ्यर्थी इस केस को GS-III उत्तरों के लिए एक आदर्श उदाहरण के रूप में अपनाएँ।

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बाह्य संदर्भ (External References)

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