UPSC Prelims Current Affairs

भारत-रूस पारस्परिक रसद विनिमय समझौता (RELOS)

Riyasat IAS Mentorship Team Updated 19 Jul 2026 8 min read

भारत-रूस पारस्परिक रसद विनिमय समझौता (RELOS)

GS Paper 2/3 | अंतरराष्ट्रीय संबंध | रक्षा सहयोग | रणनीतिक स्वायत्तता | LSA

⚡ चर्चा में क्यों? भारत-रूस के बीच पारस्परिक रसद विनिमय समझौता (RELOS) जनवरी 2026 में आधिकारिक रूप से लागू हो गया। सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी कि यह समझौता भारतीय धरती पर 3,000 रूसी सैनिकों की स्थायी तैनाती या एक सैन्य गठबंधन की अनुमति देता है। रक्षा विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह विशुद्ध प्रशासनिक और रसद समझौता है — किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं, और भारत का अब तक का नौवां ऐसा रसद सहायता समझौता (LSA) है।

लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट्स (LSA) क्या होते हैं?

पहलूविवरण
परिभाषादो देशों की सेनाओं के बीच प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए किया जाने वाला एक बुनियादी समझौता
उद्देश्यदोनों देशों की सेनाओं को आपूर्ति, मरम्मत, और ईंधन के लिए एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के उपयोग की अनुमति देता है
उपयोग के अवसरसंयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, अनौपचारिक बंदरगाह आगमन (Port Calls), और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों के दौरान ही
मुख्य लाभदोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन संबंधी कागज़ी कार्रवाई और प्रशासनिक देरी को कम करता है

RELOS की मुख्य विशेषताएं

  • पारस्परिक पहुंच: दोनों देशों के युद्धपोतों को एक-दूसरे के बंदरगाहों पर आने-जाने, मरम्मत और ईंधन भरने की सुविधा; सैन्य विमानों को एक-दूसरे के हवाई क्षेत्र और हवाई अड्डों के उपयोग की अनुमति
  • अस्थायी सीमा (3,000 सैनिकों का नियम): यह स्थायी तैनाती नहीं है — यह केवल संयुक्त अभ्यास या अभियानों के दौरान सैनिकों, जहाजों या विमानों की आवाजाही को नियंत्रित करने वाली एक व्यापक “ऊपरी सीमा” है
  • स्थायी सैन्य अड्डे नहीं: समझौता स्पष्ट करता है कि किसी भी देश में दूसरे देश का कोई स्थायी सैन्य अड्डा स्थापित नहीं किया जाएगा
  • अवधि: समझौता 5 वर्षों के लिए वैध, परिस्थितियों के अनुसार संशोधित या विस्तारित किया जा सकता है

अफवाह बनाम हकीकत: RELOS तथ्य-जांच

सोशल मीडिया का दावा (अफवाह)वास्तविक रक्षा नीति (हकीकत)
भारत और रूस एक-दूसरे के क्षेत्र में 3,000 सैनिकों की स्थायी तैनाती करेंगेयह सीमा केवल संयुक्त सैन्य अभ्यासों और HADR मिशनों के दौरान कर्मियों की अधिकतम संख्या को दर्शाती है — स्थायी तैनाती नहीं
यह भारत-रूस के बीच एक नया “सैन्य गठबंधन” हैयह एक गैर-बाध्यकारी “रसद सहायता ढांचा” है, जैसा भारत ने अमेरिका और 8 अन्य देशों के साथ पहले से कर रखा है
इससे भारत की संप्रभुता को खतरा है और विदेशी सैन्य अड्डे बनेंगेसमझौते में किसी भी प्रकार की स्थायी बेसिंग व्यवस्था का सख्त निषेध है

भारत के लिए रणनीतिक महत्व

क. भू-राजनीतिक संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता

भारत ने 2016 में अमेरिका के साथ ऐसा ही समझौता किया था जिसे LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) कहा जाता है। रूस के साथ RELOS को लागू करके भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखा है — यह संदेश देते हुए कि वह किसी एक ब्लॉक (पश्चिमी या गैर-पश्चिमी) की ओर झुका हुआ नहीं है।

ख. आर्कटिक क्षेत्र तक पहुंच

RELOS का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक पहलू यह है कि यह भारत को आर्कटिक क्षेत्र में रूसी सैन्य और रसद सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करता है। वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण आर्कटिक में नए नौवहन मार्ग खुल रहे हैं और ऊर्जा संसाधनों की खोज तेज़ हो रही है — एक ऐसा क्षेत्र जहां भारत अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहता है।

ग. भारत का वैश्विक LSA नेटवर्क

भारत ने अब तक कुल 9 देशों के साथ ऐसे समझौते किए हैं, जो भारत की बढ़ती वैश्विक नौसैनिक और सैन्य पहुंच को दर्शाता है: अमेरिका (LEMOA), ब्रिटेन, फ्रांस, वियतनाम, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, ओमान, और अब रूस (RELOS)।

📌 UPSC नोट LEMOA (2016, अमेरिका) से तुलना: LEMOA और RELOS दोनों ही केवल रसद समझौते हैं, पारस्परिक रक्षा संधियां नहीं। न तो भारत को सैन्य अभियानों या गठबंधनों में शामिल होने के लिए बाध्य करते हैं। यह अंतर GS 2 अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रश्नों में अक्सर परखा जाता है।
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न “लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट्स (LSAs) सैन्य गठबंधन का हिस्सा बने बिना किसी देश की सशस्त्र सेनाओं की परिचालन क्षमता और रणनीतिक पहुंच को बढ़ाते हैं।” हाल ही में लागू हुए भारत-रूस ‘RELOS’ समझौते के विशेष संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ) भारत-रूस पारस्परिक रसद विनिमय समझौते (RELOS) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. RELOS एक-दूसरे के क्षेत्र में स्थायी विदेशी सैन्य अड्डों की अनुमति देता है। 2. यह समझौता ईंधन भरने, मरम्मत और पुनःआपूर्ति के लिए बंदरगाहों और हवाई अड्डों तक पारस्परिक पहुंच की अनुमति देता है। 3. भारत ने अमेरिका, जापान, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के साथ इसी प्रकार के रसद सहायता समझौते किए हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2   (B) केवल 2 और 3   (C) केवल 1 और 3   (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (B) केवल 2 और 3 — कथन 1 गलत है: RELOS स्पष्ट रूप से किसी भी देश में दूसरे देश के स्थायी सैन्य अड्डे की स्थापना को प्रतिबंधित करता है; यह विशुद्ध रूप से पारस्परिक पहुंच और रसद सहायता ढांचा है।

Other Courses

  • Mentorship

    UPSC Mentorship Program

    End-to-end 1:1 mentorship across Prelims, Mains and the interview — a study plan set with a mentor and reviewed as your preparation moves.

  • Mains

    Mains Secure

    Answer writing with mentor feedback on your copies — structure, content depth and presentation reviewed against the GS papers you are writing for.

  • Foundation

    GS Foundation Mentorship

    Syllabus-mapped General Studies coverage with 1:1 mentorship, so daily reading turns into notes you can revise and answers you can write.

Not sure which one fits? Talk it through with a mentor: +91 80905 28260

Call WhatsApp Enquiry