Riyasat IAS Mentorship Team
Updated 19 Jul 2026
8 min read
आरबीआई और उसकी बढ़ती राजकोषीय भूमिका
GS Paper 3 | भारतीय अर्थव्यवस्था | बैंकिंग | राजकोषीय संघवाद | केंद्रीय बैंक स्वायत्तता
⚡ चर्चा में क्यों? RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का रिकॉर्ड अधिशेष हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है — जो ₹30,000-65,000 करोड़ के ऐतिहासिक औसत से कहीं अधिक है। यह RBI के संशोधित आर्थिक पूंजी ढांचे के अनुरूप तो है, लेकिन इसकी विशालता ने केंद्रीय बैंक की बदलती राजकोषीय भूमिका, उसकी परिचालन स्वायत्तता, और राजकोषीय संघवाद पर एक नई बहस छेड़ दी है।
मुख्य आंकड़े: अधिशेष हस्तांतरण का पैमाना
संकेतक
आंकड़ा
RBI अधिशेष हस्तांतरण (वित्त वर्ष 2026)
₹2.87 लाख करोड़ (रिकॉर्ड ऊंचाई)
ऐतिहासिक औसत अधिशेष हस्तांतरण
₹30,000 करोड़ – ₹65,000 करोड़
RBI बैलेंस शीट (मार्च 2026)
₹91.97 लाख करोड़ (20.6% वृद्धि)
RBI सकल आय वृद्धि
26%+ वार्षिक
RBI द्वारा बेचा गया सोना (फॉरेक्स हस्तक्षेप)
~$12 अरब
खरीदी गई विदेशी मुद्रा संपत्तियां
~$7.5 अरब
अधिशेष में इतनी तीव्र वृद्धि क्यों हुई?
विदेशी परिसंपत्तियों पर ब्याज: वैश्विक स्तर पर उच्च ब्याज दरों ने RBI की विदेशी मुद्रा निवेशों और प्रतिभूतियों से होने वाली आय में भारी बढ़ोतरी की
मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप: रुपये को स्थिरता देने के लिए RBI ने सक्रिय व्यापार किया — लगभग $12 अरब मूल्य का सोना बेचा और करीब $7.5 अरब की विदेशी मुद्रा संपत्तियां खरीदीं, इन लेन-देन से पर्याप्त मुनाफा अर्जित किया
संस्थागत पृष्ठभूमि को समझना
परंपरागत रूप से, केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच एक “संस्थागत दूरी” होती है: सरकारें कर और उधार के माध्यम से व्यय का प्रबंधन करती हैं, जबकि केंद्रीय बैंक मौद्रिक स्थिरता और मुद्रास्फीति नियंत्रण पर केंद्रित रहते हैं। इस हस्तांतरण का पैमाना उस पारंपरिक विभाजन को चुनौती देता है।
चुनौती क: केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता बनाम राजकोषीय साधन
मूल चिंता: क्या RBI धीरे-धीरे एक “स्थिरीकरण संस्था” से बदलकर सरकार के लिए “राजकोषीय साधन” बनता जा रहा है? यह अधिशेष सरकार को बिना नया टैक्स लगाए या नया कर्ज लिए एक बड़ी राजकोषीय गुंजाइश देता है — लेकिन इस पर अत्यधिक निर्भरता दीर्घकाल में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति के स्वतंत्र निर्णयों को प्रभावित कर सकती है।
चुनौती ख: राजकोषीय संघवाद — “संघीय अंध बिंदु”
मुद्दा
निहितार्थ
गैर-कर राजस्व के रूप में वर्गीकरण
RBI अधिशेष “गैर-कर राजस्व” के अंतर्गत आता है — यह राज्यों के साथ साझा किए जाने वाले विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं है
वित्त आयोग सूत्र लागू नहीं
₹2.87 लाख करोड़ की इस विशाल राशि पर वित्त आयोग का सूत्र लागू नहीं होता — राज्यों को इससे कोई स्वचालित हिस्सा नहीं मिलता
संवैधानिक तनाव
राज्य भारी व्यय दबाव का सामना करते हैं और संविधान के अनुच्छेद 293 के तहत सख्त उधार सीमाओं से बंधे हैं, जबकि यह विशाल राशि केवल केंद्र के पास केंद्रित रहती है — जो अनजाने में “राजकोषीय केंद्रीकरण” को बढ़ावा देती है
📌 UPSC नोट संविधान का अनुच्छेद 293 राज्यों की उधार क्षमता को सीमित करता है — यदि कोई राज्य केंद्र का ऋणी है तो उसे नया ऋण लेने के लिए केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक होती है। यह संवैधानिक असंतुलन RBI अधिशेष हस्तांतरण से जुड़ी राजकोषीय संघवाद बहस का केंद्र बिंदु है।
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न“केंद्रीय बैंक द्वारा सरकार को बड़े पैमाने पर अधिशेष हस्तांतरण राजकोषीय घाटे को तो प्रबंधित करता है, लेकिन यह राजकोषीय संघवाद और केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।” कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
📝 अभ्यास प्रश्न (MCQ)भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भारत सरकार को किए जाने वाले अधिशेष हस्तांतरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह हस्तांतरण RBI के आर्थिक पूंजी ढांचे (Economic Capital Framework) द्वारा शासित होता है। 2. RBI अधिशेष हस्तांतरण को कर राजस्व के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसलिए यह राज्यों के साथ साझा विभाज्य कोष का हिस्सा है। 3. राज्यों को वित्त आयोग के सूत्र के आधार पर RBI अधिशेष का स्वचालित हिस्सा प्राप्त होता है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 (B) केवल 1 और 2 (C) केवल 2 और 3 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (A) केवल 1 — कथन 2 और 3 गलत हैं: RBI अधिशेष को गैर-कर राजस्व के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, अर्थात यह विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं है, और राज्यों को वित्त आयोग के सूत्र के माध्यम से इसका कोई स्वचालित हिस्सा नहीं मिलता।