UPSC Prelims Current Affairs

UPSC करेंट अफेयर्स 25 जून 2026

Riyasat IAS Mentorship Team Updated 19 Jul 2026 30 min read

आज के विषय (Topics Covered Today) — 3

  • ‘इंडो’ (Indo) शब्द का हटना: भारत के लिए रणनीतिक मायने — GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध, भारत-अमेरिका, QUAD, भू-राजनीति)
  • भारत में आघात देखभाल (Trauma Care): ‘जीवन के अधिकार’ का विस्तार — GS पेपर 2 (राजव्यवस्था, अनुच्छेद 21, स्वास्थ्य नीति, न्यायपालिका)
  • भारत का जनसांख्यिकीय मोड़: निम्न TFR और बूढ़ा होता समाज — GS पेपर 1 (जनसंख्या) एवं GS पेपर 2/3 (सामाजिक न्याय, श्रम, संघवाद)
विषय 1: ‘इंडो’ (Indo) शब्द का हटना — भारत के लिए रणनीतिक मायने GS पेपर 2 │ भारत-अमेरिका संबंध │ QUAD │ इंडो-पैसिफिक │ पश्चिम एशिया │ दक्षिण एशिया │ भू-राजनीति
चर्चा में क्यों? 2018 में अमेरिका ने भारत के बढ़ते महत्व को देखते हुए अपनी पैसिफिक कमान का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमान’ (INDOPACOM) किया था। लेकिन 2026 में ट्रंप 2.0 प्रशासन द्वारा ‘इंडो’ शब्द को हटाकर इसे फिर से ‘यूएस पाकॉम’ (US PACOM) करना यह दर्शाता है कि अमेरिका की प्राथमिकताओं में भारत का स्थान बदल रहा है। यह महज एक प्रशासनिक नामकरण परिवर्तन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संकेत है।

अमेरिका-चीन संबंध और क्वाड (QUAD) का भविष्य

  • ‘G-2’ का पुनर्जन्म: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा से साफ है कि दोनों महाशक्तियां आपस में टकराव टालना चाहती हैं। ट्रंप द्वारा ‘G-2’ (अमेरिका और चीन का वैश्विक प्रभुत्व) का जिक्र करना भारत के ‘बहुध्रुवीय एशिया’ के सपने को झटका दे सकता है, क्योंकि इससे एशिया में चीन का प्रभाव क्षेत्र बढ़ जाएगा।
  • कमजोर पड़ता क्वाड: जनवरी 2026 की अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में क्वाड का जिक्र तक न होना और इसके एजेंडे को केवल समुद्री सुरक्षा और आपदा राहत तक सीमित कर देना यह दिखाता है कि अमेरिका अब इसे चीन के खिलाफ एक सैन्य या मजबूत रणनीतिक मोर्चे के रूप में नहीं देख रहा है।
  • तकनीकी राष्ट्रवाद: ‘पैक्स सिलिका’ समझौते के बावजूद अमेरिका ने एंथ्रोपिक जैसी AI कंपनियों को गैर-अमेरिकियों के लिए प्रतिबंधित कर दिया, जिससे भारत जैसे सहयोगियों को तकनीकी झटका लगा है।

पश्चिम एशिया का नया समीकरण और भारत

  • इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह युद्धविराम समझौता पूरे क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को बदल रहा है। इसके तहत अमेरिका को ईरान के आसपास से सेना हटानी होगी और ईरान को पुनर्निर्माण के लिए $300 अरब की राशि मिलेगी।
  • बदलती भूमिकाएं: होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण अब ईरान और ओमान के हाथों में जाने की संभावना है। ओमान, कतर और पाकिस्तान इस नई व्यवस्था के केंद्र में हैं, जबकि सऊदी अरब तुर्की और यूक्रेन के साथ नए सुरक्षा विकल्प ढूंढ रहा है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और खाड़ी में कूटनीतिक प्रभाव सीधे प्रभावित होते हैं।

दक्षिण एशिया में चुनौतियां

  • अमेरिकी दूत की सक्रियता: सर्जियो गोर की भारत, नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका की यात्राएं दर्शाती हैं कि अमेरिका अब दक्षिण एशिया में सीधे प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
  • भारत को दरकिनार करने की कोशिश: भारत के अपने पड़ोसियों (जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश) के साथ तनाव के कारण SAARC और BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय संगठन ठंडे बस्ते में हैं। इस शून्यता का फायदा उठाकर अमेरिका और चीन दोनों ही भारत को उसके अपने ही प्रभाव क्षेत्र में दरकिनार कर रहे हैं।

भारत की रणनीतिक पुनर्गणना

रणनीतिक आयामचुनौतीभारत की अनिवार्य प्रतिक्रिया
इंडो-पैसिफिक ढांचाQUAD कमजोर; अमेरिका चीन के साथ G-2 की ओरभारत-जापान, भारत-ऑस्ट्रेलिया, भारत-EU द्विपक्षीय संबंध मजबूत करना
पश्चिम एशिया और ऊर्जा सुरक्षाहोर्मुज नियंत्रण ईरान-ओमान की ओर; खाड़ी पुनर्गठनभारत-ईरान ऊर्जा गलियारे और चाबहार बंदरगाह सुदृढ़ करना
दक्षिण एशियाई पड़ोसSAARC/BIMSTEC ठप; अमेरिका-चीन शून्यता भर रहेपड़ोसियों के साथ द्विपक्षीय कूटनीति पुनर्जीवित करना
तकनीकी संप्रभुताAI तक अमेरिकी पहुंच प्रतिबंधित; पैक्स सिलिका सीमितस्वदेशी AI और सेमीकंडक्टर क्षमता त्वरित करना
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह विषय GS पेपर 2 के केंद्र में है — भारत-अमेरिका संबंध, QUAD, इंडो-पैसिफिक रणनीति, पड़ोसी प्रथम नीति, भारत की विदेश नीति। INDOPACOM→PACOM परिवर्तन, G-2 ढांचा, इस्लामाबाद MoU, और दक्षिण एशिया में हाशियाकरण — सभी IR के मुख्य परीक्षा उत्तरों के लिए उच्च मूल्य के कोण हैं। ‘सत्ता परिवर्तन सिद्धांत’ के साथ जोड़ने पर विश्लेषणात्मक गहराई और बढ़ती है।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा) “यूएस इंडोपाकॉम (US INDOPACOM) का नाम बदलकर पुनः यूएस पाकॉम (US PACOM) किया जाना वैश्विक भू-राजनीति में उभरते नए समीकरणों का सूचक है।” इस कथन के आलोक में विश्लेषण कीजिए कि यह बदलाव भारत की विदेश नीति और उसके पड़ोस (Neighborhood) को किस प्रकार प्रभावित करेगा? (250 शब्द, 15 अंक)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ) अमेरिका के 2026 में रणनीतिक पुनर्स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अमेरिका ने 2018 में भारत की बढ़ती रणनीतिक महत्ता को मान्यता देते हुए अपनी पैसिफिक कमान का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमान’ (INDOPACOM) किया था। 2. जनवरी 2026 की अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति ने QUAD को इंडो-पैसिफिक में चीन के विरुद्ध एक प्राथमिक सैन्य गठबंधन के रूप में स्पष्ट रूप से चिह्नित किया। 3. होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है जिससे होकर भारत के तेल आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 2   (B) केवल 1 और 3   (C) केवल 2 और 3   (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (B) केवल 1 और 3 — कथन 2 गलत है: जनवरी 2026 की अमेरिकी राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में QUAD का कोई उल्लेख ही नहीं था, और इसके एजेंडे को केवल समुद्री सुरक्षा और आपदा राहत तक सीमित कर दिया गया — यह उन्नयन नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण अवनति थी।
विषय 2: भारत में आघात देखभाल (Trauma Care) — ‘जीवन के अधिकार’ का विस्तार GS पेपर 2 │ अनुच्छेद 21 │ सेवलाइफ फाउंडेशन वाद 2026 │ स्वास्थ्य नीति │ सहकारी संघवाद
⚡ चर्चा में क्यों? हाल ही में सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए, सर्वोच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ) ने ‘सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2026)’ मामले में यह फैसला सुनाया कि समय पर आघात उपचार (Trauma Care) का अधिकार, संविधान के अनुच्छेद 21 का एक अभिन्न हिस्सा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह अधिकार केवल अस्पताल पहुंचने पर शुरू नहीं होता, बल्कि ‘चोट लगने के स्थान से लेकर अस्पताल में अंतिम उपचार’ तक की पूरी श्रृंखला पर लागू होता है।

समस्या की गंभीरता

संकेतकआंकड़े
विभिन्न चोटों से वार्षिक मृत्यु (NCRB)~4.67 लाख प्रति वर्ष
सड़क दुर्घटनाओं से मृत्यु~1.77 लाख प्रति वर्ष
सर्वाधिक प्रभावित वर्ग18-45 आयु वर्ग — भारत का सबसे उत्पादक कार्यबल
‘गोल्डन आवर’ का महत्व (विधि आयोग, 201वीं रिपोर्ट)प्रथम घंटे में उपचार मिले तो 50% मौतें रोकी जा सकती हैं
विलंब के कारण मृत्यु (NITI Aayog-AIIMS)30% आघात मृत्युएं केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी से होती हैं

न्यायिक न्यायशास्त्र का विकास

1. परमानंद कटारा वाद (1989) — डॉक्टरों का प्राथमिक कर्तव्य

न्यायालय ने माना कि घायल व्यक्ति की जान बचाना हर डॉक्टर का सर्वोपरि कर्तव्य है। किसी भी डॉक्टर या अस्पताल को पुलिस रिपोर्ट या अन्य कानूनी औपचारिकताओं (Medico-Legal formalities) के पूरा होने का इंतजार किए बिना तुरंत आपातकालीन इलाज शुरू करना होगा।

2. पश्चिम बंगाल खेत मजदूर समिति वाद (1996) — अनुच्छेद 21 का विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने आपातकालीन चिकित्सा और इलाज तक पहुंच को संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) का एक अनिवार्य हिस्सा घोषित किया। इसके तहत सरकार पर यह सकारात्मक दायित्व डाला गया कि वह नागरिकों को समय पर मुफ्त या सुलभ आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करे।

3. सेवलाइफ फाउंडेशन वाद (2026) — एकीकृत आघात श्रृंखला

न्यायालय ने आपातकालीन चिकित्सा के अधिकार को और अधिक व्यापक बनाते हुए इसे एक पूरी श्रृंखला के रूप में अनुच्छेद 21 के तहत सकारात्मक अधिकार माना:

  • घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों (Good Samaritans) की सुरक्षा
  • त्वरित आपातकालीन कॉल (हेल्पलाइन 112) की उपलब्धता
  • समय पर एम्बुलेंस और प्रशिक्षित पैरामेडिक (EMT) की सुविधा
  • अंत में उपयुक्त अस्पताल/ट्रॉमा सेंटर में त्वरित इलाज

सर्वोच्च न्यायालय के 5 प्रमुख बाध्यकारी निर्देश

निर्देशविशिष्ट आवश्यकतासमयसीमा
एकीकृत संचार प्रणालीसभी मौजूदा आपातकालीन नंबरों (100, 101, 102, 108, 1033) को एकल हेल्पलाइन नंबर ‘112’ (ERSS) में एकीकृत करना3 महीने
‘गुड सैमेरिटन’ (नेक मददगार) की सुरक्षादुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले राहगीरों को पुलिस या कानूनी उत्पीड़न से बचाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारी और डिजिटल शिकायत निवारण प्रणालीतत्काल
प्री-हॉस्पिटल रिस्पॉन्स मानकसभी एम्बुलेंस को राष्ट्रीय एम्बुलेंस कोड (AIS-125) का पालन; GPS अनिवार्य (112 से सीधा जुड़ा); NCAHP द्वारा प्रमाणित EMT पाठ्यक्रम सभी राज्यों मेंचरणबद्ध
अस्पतालों का मानकीकरणसभी ट्रॉमा सेंटरों और अस्पतालों का क्षमताओं के आधार पर वर्गीकरण; स्वास्थ्य मंत्रालय ‘राष्ट्रीय चिकित्सा बचाव प्रोटोकॉल’ और राष्ट्रीय आघात रजिस्ट्री डेटा प्रारूप तैयार करेचरणबद्ध
कैशलेस उपचार — PM-RAHATराज्यों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की ‘PM-RAHAT’ योजना 8 सप्ताह में लागू करनी होगी; न करने पर मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा8 सप्ताह

सहकारी संघवाद की भूमिका

‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल’ संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत राज्य सूची का विषय हैं, इसलिए केंद्र इस व्यवस्था को अकेले लागू नहीं कर सकता।

  • केंद्र सरकार: ‘सहायक और मार्गदर्शक’ की भूमिका — राष्ट्रीय नीति ढांचे (राष्ट्रीय एम्बुलेंस कोड, गुड सैमेरिटन नियम, PM-RAHAT) प्रदान करना।
  • राज्य सरकारें: ज़मीनी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी — एम्बुलेंस नेटवर्क, हेल्पलाइन एकीकरण, अस्पताल वर्गीकरण और EMT प्रशिक्षण। यह निर्देश राज्यों के अधिकारों को कम नहीं करते, बल्कि मौजूदा केंद्रीय नीतियों को न्यायिक शक्ति प्रदान करते हैं।

कार्यान्वयन की चुनौतियां

  • राज्यों की असमान क्षमता: स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे के मामले में भारत के विभिन्न राज्यों (जैसे केरल बनाम बिहार) की क्षमता और बजट में भारी अंतर है।
  • एम्बुलेंस नेटवर्क का बिखराव: भारत में एम्बुलेंस सेवाएं अत्यधिक असंगठित हैं, जिनमें निजी और सरकारी एम्बुलेंस के बीच समन्वय की भारी कमी है।
  • डिजिटल एकीकरण की सुस्ती: कई राज्यों में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अलग-अलग हेल्पलाइनों को ‘112’ में मिलाना एक जटिल कार्य रहा है।
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह निर्णय GS पेपर 2 (अनुच्छेद 21, मौलिक अधिकारों का विस्तार, सकारात्मक बनाम नकारात्मक अधिकार, सहकारी संघवाद, न्यायिक सक्रियता) को GS पेपर 3 (स्वास्थ्य नीति, सार्वजनिक अवसंरचना) से जोड़ता है। तीन-वाद न्यायिक विकास (1989 → 1996 → 2026) एक तैयार विश्लेषणात्मक ढांचा है। ‘गोल्डन आवर’ डेटा और PM-RAHAT योजना विशिष्ट, उद्धरण योग्य तथ्य हैं।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा) “भारत में नीतियों या दिशानिर्देशों की कमी नहीं है, बल्कि कमी एक समान और लागू करने योग्य आघात देखभाल (Trauma Care) ढांचे की है।” हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘आघात उपचार के अधिकार’ को अनुच्छेद 21 के तहत शामिल किए जाने के आलोक में, इसके प्रभावी कार्यान्वयन की चुनौतियों और रणनीतियों की विवेचना कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ) सेवलाइफ फाउंडेशन बनाम भारत संघ (2026) मामले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि समय पर आघात उपचार का अधिकार, अनुच्छेद 21 का अभिन्न हिस्सा है, जो चोट लगने के स्थान से अंतिम अस्पताल उपचार तक की पूरी श्रृंखला को कवर करता है। 2. ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल’ संविधान की 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची का विषय है, जिससे केंद्र सरकार सीधे ट्रॉमा केयर निर्देशों को लागू कर सकती है। 3. ‘गुड सैमेरिटन’ दिशानिर्देश उन राहगीरों की रक्षा करते हैं जो दुर्घटना पीड़ितों की मदद करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 और 3   (B) केवल 2 और 3   (C) केवल 1   (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (A) केवल 1 और 3 — कथन 2 गलत है: ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल’ संविधान की 7वीं अनुसूची की राज्य सूची का विषय है, न कि समवर्ती सूची का। इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार केवल ‘सहायक और मार्गदर्शक’ की भूमिका निभा सकती है, जबकि राज्य सरकारें ज़मीनी क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार हैं।
विषय 3: भारत का जनसांख्यिकीय मोड़ — निम्न TFR और बूढ़ा होता समाज GS पेपर 1 │ जनसंख्या एवं संबंधित मुद्दे │ GS पेपर 2 │ सामाजिक न्याय │ GS पेपर 3 │ श्रम अर्थव्यवस्था │ संघवाद
चर्चा में क्यों? नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) गिरकर 1.9 पर आ गई है। यह जनसंख्या स्थिरता के लिए आवश्यक प्रतिस्थापन स्तर (2.1) और वैश्विक औसत (2.2) दोनों से कम है। यह दर्शाता है कि भारत अब ‘जनसंख्या विस्फोट’ के दौर से बाहर निकलकर ‘जनसंख्या संकुचन और वृद्धावस्था’ की ओर बढ़ रहा है।

भारत का जनसांख्यिकीय विभाजन

भारत में प्रजनन दर में गिरावट एकसमान नहीं है, जिससे देश के भीतर एक बड़ा क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो रहा है:

राज्यTFRतुलनात्मक वैश्विक संदर्भ
दिल्ली1.2जापान (1.3) से भी कम
केरल1.3जापान (1.3) के समान
तमिलनाडु1.3जापान (1.3) के समान
पश्चिम बंगाल1.3अमेरिका (1.6) से कम
बिहार2.9प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर
उत्तर प्रदेश2.6प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर
मध्य प्रदेश2.4प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर
राजस्थान2.3प्रतिस्थापन स्तर से ऊपर
भारत (राष्ट्रीय औसत)1.9प्रतिस्थापन स्तर (2.1) और वैश्विक औसत (2.2) से नीचे

‘अमीर होने से पहले ही बूढ़ा होना’ — भारत की अनूठी चुनौती

पश्चिमी यूरोप और जापान भी इस दौर से गुजरे हैं, लेकिन भारत का संकट उनसे अलग और अधिक गंभीर है क्योंकि “भारत अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो रहा है।”

विकसित देशों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन (बुढ़ापे) का क्रम था: औद्योगीकरण → उच्च प्रति व्यक्ति आय → कर आधार का विस्तार → मजबूत सामाजिक सुरक्षा → बूढ़ा होता समाज। भारत में यह क्रम उल्टा है:

1. अनौपचारिक श्रम बाजार और कमजोर आय सुरक्षा

  • ~90% कार्यबल अनौपचारिक (Informal) क्षेत्र में — बिना नौकरी की सुरक्षा, भविष्य निधि (PF) या सामाजिक सुरक्षा के लाभ के
  • अटल पेंशन योजना: नियमित योगदान की आवश्यकता — अनिश्चित आय वाले अनौपचारिक श्रमिकों के लिए संरचनात्मक रूप से दुर्गम।
  • NSAP वृद्धावस्था पेंशन: ₹200–₹500 प्रति माह — किसी भी शहरी या अर्ध-शहरी संदर्भ में जीवन यापन के लिए पूर्णतः अपर्याप्त।
  • NITI Aayog के आंकड़े: 70% बुजुर्ग भारतीय पूरी तरह परिवार पर आश्रित हैं; 78% के पास किसी भी प्रकार का कोई पेंशन तंत्र नहीं है।

2. पारंपरिक पारिवारिक सहायता प्रणाली का विघटन

भारत में बुजुर्गों की देखभाल ऐतिहासिक रूप से अनौपचारिक रही है — संयुक्त परिवार प्रणाली और महिलाओं के अवैतनिक घरेलू श्रम पर निर्भर। शहरीकरण, एकल परिवारों का चलन और युवाओं का अंतर-राज्यीय प्रवासन इस व्यवस्था को तेजी से नष्ट कर रहे हैं। परिणाम: बुजुर्गों में बढ़ती एकाकीपन, अनुपचारित मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और बिना किसी संस्थागत सुरक्षा कवच के स्वास्थ्य संकट।

3. स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव

  • वर्तमान में देश में 15 करोड़ (60+ वर्ष) बुजुर्ग हैं
  • 2050 तक यह संख्या लगभग 34 करोड़ (कुल जनसंख्या का ~20%) हो जाएगी
  • यह संक्रामक रोगों से दीर्घकालिक गैर-संचारी रोगों (NCDs) — उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मनोभ्रंश, कैंसर, उपशामक देखभाल — की ओर रोग भार में मौलिक बदलाव करेगा, जिसके लिए भारत का प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचा डिज़ाइन या वित्त पोषित नहीं है

संघीय आयाम और प्रवासन की राजनीति

वृद्ध होते समृद्ध राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडु) को अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए युवा राज्यों (जैसे बिहार, यूपी) से आने वाले प्रवासियों की आवश्यकता होगी। इसके लिए दो मोर्चों पर काम करना होगा:

  • मानव पूंजी में निवेश: युवा राज्यों को अपने कार्यबल को शिक्षित और कुशल बनाना होगा ताकि वे केवल कम वेतन वाले अनौपचारिक मजदूर बनकर न रह जाएं।
  • कल्याणकारी लाभों की सुवाह्यता: यदि कोई श्रमिक राज्य की सीमा पार करता है, तो उसके सामाजिक सुरक्षा अधिकार (राशन, स्वास्थ्य, पेंशन) भी उसके साथ ट्रांसफर होने चाहिए। वर्तमान राज्य-दर-राज्य खंडित कल्याण ढांचा श्रम गतिशीलता को हतोत्साहित करता है।

नीति समीक्षा: चुनौतियां और समाधान

आयामवर्तमान स्थिति / चुनौतीनीतिगत समाधान
सामाजिक सुरक्षा78% बुजुर्गों के पास कोई पेंशन नहीं; अनौपचारिक कार्यबल का वर्चस्वमुद्रास्फीति-अनुक्रमित न्यूनतम पेंशन की गारंटी; NSAP में पर्याप्त वृद्धि
स्वास्थ्य अवसंरचनास्वास्थ्य प्रणालियां बुजुर्गों की दीर्घकालिक बीमारियों के लिए तैयार नहींप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में वृद्धों की देखभाल को मिशन मोड में शामिल करना
संघीय प्रवासनप्रवासी श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा का अभावकल्याणकारी लाभों की सुवाह्यता सुनिश्चित करना; एक राष्ट्र एक राशन कार्ड को मॉडल के रूप में विस्तारित करना
महिलाएं और अवैतनिक देखभालअनौपचारिक बुजुर्ग देखभाल का बोझ असंगत रूप से महिलाओं परदेखभाल कार्य को औपचारिक मान्यता; सामुदायिक बुजुर्ग देखभाल केंद्रों में निवेश
UPSC नोट UPSC मुख्य परीक्षा लिंकेज: यह विषय GS पेपर 1 (जनसंख्या और जनसांख्यिकीय संक्रमण), GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय, संघवाद, कल्याण योजनाएं — APY, NSAP) और GS पेपर 3 (श्रम बाजार, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था) से जुड़ता है। ‘अमीर होने से पहले ही बूढ़ा होना’ वाक्यांश, राज्य-वार TFR डेटा तालिका, ‘78% के पास कोई पेंशन नहीं’ का आंकड़ा और आंतरिक प्रवासन-कल्याण सुवाह्यता का कोण सभी परीक्षा में उच्च मूल्य के उपकरण हैं।
परीक्षोपयोगी प्रश्न (मुख्य परीक्षा) “भारत अमीर होने से पहले ही बूढ़े होने की जनसांख्यिकीय चुनौती का सामना कर रहा है।” देश के भीतर असमान प्रजनन दर (TFR) के आलोक में, इस बदलाव के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों की चर्चा कीजिए तथा इसके समाधान हेतु आवश्यक नीतिगत हस्तक्षेपों का सुझाव दीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)
परीक्षोपयोगी प्रश्न (प्रारंभिक परीक्षा – MCQ) भारत के जनसांख्यिकीय परिवर्तन और घटती कुल प्रजनन दर (TFR) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नवीनतम नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) के अनुसार, भारत की राष्ट्रीय TFR गिरकर 1.9 पर आ गई है, जो जनसंख्या प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे है। 2. दिल्ली और केरल जैसे राज्यों की TFR जापान और अमेरिका जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं से भी कम है। 3. NITI Aayog के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 78% बुजुर्ग भारतीयों के पास किसी भी प्रकार का कोई पेंशन तंत्र नहीं है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं? (A) केवल एक   (B) केवल दो   (C) सभी तीन   (D) कोई भी नहीं उत्तर: (C) सभी तीन — तीनों कथन सही हैं: भारत की राष्ट्रीय TFR 1.9 (प्रतिस्थापन स्तर 2.1 से नीचे); दिल्ली (1.2) जापान (1.3) से भी कम, केरल (1.3) जापान के समान और अमेरिका (1.6) से कम; तथा NITI Aayog के अनुसार 78% बुजुर्गों के पास कोई पेंशन तंत्र नहीं।
रियासत IAS मेंटरशिप — UPSC CSE के लिए स्मार्ट तैयारी करें रियासत अली सर से सीधा मार्गदर्शन │ हिंदी और अंग्रेजी माध्यम │ 100% ऑनलाइन Apply at iasmentorship.com/admissions
उपयोगी लिंक (Useful Links) करेंट अफेयर्स संसाधन → UPSC मेंटरशिप प्रोग्राम → फाउंडेशन मेंटरशिप (हिंदी) →

Other Courses

  • Mentorship

    UPSC Mentorship Program

    End-to-end 1:1 mentorship across Prelims, Mains and the interview — a study plan set with a mentor and reviewed as your preparation moves.

  • Mains

    Mains Secure

    Answer writing with mentor feedback on your copies — structure, content depth and presentation reviewed against the GS papers you are writing for.

  • Foundation

    GS Foundation Mentorship

    Syllabus-mapped General Studies coverage with 1:1 mentorship, so daily reading turns into notes you can revise and answers you can write.

Not sure which one fits? Talk it through with a mentor: +91 80905 28260

Call WhatsApp Enquiry