ड्रोन क्रांति और आधुनिक युद्ध — GS 3 (रक्षा प्रौद्योगिकी, आंतरिक सुरक्षा)
विषय 1: लू (Heatwaves) और सतही ओज़ोन GS Paper 3 | पर्यावरण | वायु प्रदूषण | सार्वजनिक स्वास्थ्य | जलवायु परिवर्तन
चर्चा में क्यों? जर्नल npj Clean Air में प्रकाशित एक हालिया सहकर्मी-समीक्षित अध्ययन में भारत में बढ़ रहे एक गंभीर “साइलेंट किलर” की ओर इशारा किया गया है। लू के थपेड़े न सिर्फ तापमान बढ़ाते हैं, बल्कि हवा में एक ज़हरीले प्रदूषक — सतही ओज़ोन — की मात्रा को भी खतरनाक स्तर तक ले जाते हैं, जिससे दिल और फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मौतों का आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है।
मुख्य आंकड़े एक नज़र में
डेटा बिंदु
आंकड़ा / निष्कर्ष
WHO सुरक्षित ओज़ोन सीमा
70 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³)
लू के दौरान उत्तर भारत में ओज़ोन स्तर
85-110 µg/m³ (सुरक्षित सीमा से 21-57% अधिक)
2024 की लू में ओज़ोन से जुड़ी मौतें
~26,500 (इस्केमिक हृदय रोग + COPD)
अत्यधिक लू तीव्रता से अतिरिक्त मौतें
~830 (490 हृदय रोग + 342 COPD)
सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र
पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (पिछले 20 वर्षों में सबसे तीव्र वृद्धि)
अध्ययन की अवधि
20 वर्षों में 188 लू की घटनाओं का विश्लेषण
सर्वाधिक भीषण ओज़ोन संकट के वर्ष
2010, 2016, 2019 और 2024 — सभी अल-नीनो प्रभाव वाले वर्ष
सतही ओज़ोन क्या है?
ओज़ोन प्रकार
स्थान
भूमिका
समतापमंडलीय ओज़ोन (Stratospheric)
पृथ्वी से 15-35 किमी ऊपर (ओज़ोन परत)
सुरक्षात्मक — UV-B विकिरण अवशोषित करती है
सतही / क्षोभमंडलीय ओज़ोन (Tropospheric)
ज़मीनी स्तर (0-2 किमी)
हानिकारक — ज़हरीला द्वितीयक प्रदूषक; हृदय और फेफड़ों को नुकसान
निर्माण प्रक्रिया: सतही ओज़ोन एक द्वितीयक प्रदूषक है — यह सीधे गाड़ियों या कारखानों की चिमनियों से नहीं निकलती। यह तब बनती है जब प्राथमिक प्रदूषक जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक (VOCs जैसे फॉर्मेल्डिहाइड) तेज धूप और उच्च तापमान की उपस्थिति में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।
नीतिगत चुनौतियाँ और आगे की राह
चुनौती
आवश्यक नीतिगत प्रतिक्रिया
ज़मीनी स्तर पर ओज़ोन निगरानी तंत्र का अभाव
NCAP (राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम) के तहत सभी Tier-1 और Tier-2 शहरों में निरंतर ओज़ोन निगरानी केंद्र अनिवार्य किए जाएं
हीट एक्शन प्लान में वायु गुणवत्ता का अभाव
NDMA और राज्य सरकारें Heat Action Plans में सतही ओज़ोन मापदंड शामिल करें — लू को केवल थर्मल संकट के रूप में न देखें
ओज़ोन-पूर्ववर्ती गैसों का उत्सर्जन
BS-VI नियमों का कड़ा प्रवर्तन और औद्योगिक VOC नियमन — लक्षण नहीं, कारण पर ध्यान दें
जलवायु-प्रदूषण का संयुक्त जोखिम
भारत के जलवायु अनुकूलन ढांचे में बढ़ते तापमान और खराब वायु गुणवत्ता के संयुक्त स्वास्थ्य जोखिम को स्वीकार किया जाए
📌 UPSC नोट नोट: जलवायु परिवर्तन केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है; यह वायु प्रदूषण की रासायनिक संरचना को बदलकर जनस्वास्थ्य के संकट को कई गुना बढ़ा रहा है। नीति निर्माताओं को अब “हीट एक्शन प्लान” बनाते समय वायु गुणवत्ता को भी उसमें शामिल करना होगा।
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न“भारत में लू (Heatwaves) की बढ़ती आवृत्ति न केवल एक थर्मल संकट है, बल्कि यह वायु रासायनिक परिवर्तनों के माध्यम से स्वास्थ्य के खतरों को भी बढ़ा रही है।” हालिया रिपोर्टों के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए और इसके शमन के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्नसतही ओज़ोन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सतही ओज़ोन एक प्राथमिक प्रदूषक है जो वाहनों और कारखानों से सीधे उत्सर्जित होती है। 2. सतही ओज़ोन का निर्माण NO₂ और VOCs के तेज धूप तथा उच्च तापमान की उपस्थिति में रासायनिक प्रतिक्रिया से होता है। 3. समतापमंडलीय ओज़ोन और सतही ओज़ोन दोनों मानव स्वास्थ्य के लिए समान रूप से हानिकारक हैं। उपर्युक्त में से कौन-सा/से सही है/हैं? (A) केवल 1 (B) केवल 2 (C) 2 और 3 (D) 1, 2 और 3 उत्तर: (B) केवल 2 — कथन 1 गलत है: सतही ओज़ोन द्वितीयक प्रदूषक है, प्राथमिक नहीं। कथन 3 गलत है: समतापमंडलीय ओज़ोन UV-B से सुरक्षा करती है (लाभदायक), जबकि सतही ओज़ोन हृदय और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है (हानिकारक)।
विषय 2: गठबंधन राजनीति, लोकतांत्रिक प्रतिरोध और भारतीय लोकतंत्र का भविष्य GS Paper 2 | राजव्यवस्था | शासन | राजनीतिक दल | नागरिक समाज
⚡ चर्चा में क्यों? वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में विपक्ष की भूमिका और गठबंधन का भविष्य केवल चुनावी अंकगणित से आगे जाकर विविधता की रक्षा का माध्यम बन गया है। किसानों, मज़दूरों और छात्रों के जन-आंदोलनों ने सिद्ध किया है कि जीवंत लोकतंत्र में “सकारात्मक प्रतिरोध” नीतियों को जन-आकांक्षी बनाने और सत्ता को जवाबदेह रखने का सबसे सशक्त उपकरण है।
ऐतिहासिक संदर्भ: स्वतंत्रता संग्राम और “पूर्ण स्वराज” की विरासत
घटना
विवरण
विचार की उत्पत्ति
1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में दो साम्यवादी प्रतिनिधियों — मौलाना हसरत मोहानी और स्वामी कुमारानंद — ने पहली बार “पूर्ण स्वराज” का विचार रखा
आधिकारिक लक्ष्य
1927 के मद्रास अधिवेशन में प्रस्तुत; 1929 के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस का आधिकारिक लक्ष्य घोषित
विविध विचारधाराओं का संगम
स्वतंत्रता संग्राम किसी एक दल का एकाधिकार नहीं — वामपंथी, समाजवादी और फुले-अंबेडकर-पेरियार विचारधाराओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर योगदान दिया
“एक राष्ट्र, एक दल” की नीति क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय दलों के अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करती है
दलबदल की राजनीति: फासीवादी और सर्वसत्तावादी आक्रमण के सामने कोई भी दल सुरक्षित नहीं — दलबदल इसका प्रत्यक्ष उदाहरण
संस्थागत क्षरण: चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल और “बुलडोजर संस्कृति” का ज़मीनी स्तर पर कानून के शासन पर हावी होना — दोनों चिंता का विषय
लोकतंत्र में “प्रतिरोध” की भूमिका और जन-आंदोलन
आंदोलन
परिणाम / महत्व
2014 का भूमि अधिग्रहण अध्यादेश विरोधी आंदोलन
सरकार ने विवादास्पद अध्यादेश वापस लिया — किसान सहमति को कमज़ोर करने वाले प्रावधान हटाए गए
ऐतिहासिक किसान आंदोलन (2020-21)
तीनों कृषि कानूनों की वापसी (नवंबर 2021) — आधुनिक भारत का सबसे महत्वपूर्ण नीतिगत पलटाव
CAA के विरुद्ध नागरिक अधिकार आंदोलन (2019-20)
संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए नागरिक समाज की तत्परता का प्रदर्शन
छात्र और श्रमिक आंदोलन
AISA, SFI जैसे वामपंथी छात्र संगठन और CJP जैसे डिजिटल मंच जवाबदेही तय करने का काम कर रहे हैं
आगे की राह: गठबंधन शासन के लिए
विविधता में एकता: INDIA गठबंधन 23 विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों का समूह है — बड़े दल छोटे क्षेत्रीय दलों की वैचारिक पहचान का सम्मान करें
जमीनी संघर्षों से जुड़ाव: केवल चुनावी समन्वय पर्याप्त नहीं — किसानों, मज़दूरों और छात्रों की वास्तविक समस्याओं से जुड़कर सार्वजनिक निराशा को रचनात्मक राजनीतिक विकल्प में बदलना होगा
नेतृत्व की दोहरी भूमिका: नेताओं पर अपनी पार्टी को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ गठबंधन के भीतर विश्वास और सामंजस्य की संस्कृति विकसित करने की जिम्मेदारी
चुनावी झटकों से सीख: महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली के झटकों के बाद गठबंधन को केवल चुनावी अंकगणित के बजाय साझा सकारात्मक एजेंडे के साथ जनता के बीच जाना होगा
📝 परीक्षोपयोगी प्रश्न“संसदीय लोकतंत्र की जीवंतता के लिए एक मजबूत और एकजुट विपक्ष का होना अनिवार्य है।” भारतीय राजनीति में गठबंधन सरकारों के बदलते स्वरूप और समकालीन चुनौतियों के आलोक में इस कथन की समीक्षा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
विषय 3: भारत-फ्रांस रणनीतिक संबंध — प्रौद्योगिकी और नवाचार GS Paper 2 | अंतरराष्ट्रीय संबंध | भारत की विदेश नीति | प्रौद्योगिकी कूटनीति | DPI
चर्चा में क्यों? भारत के प्रधानमंत्री ने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांस का दौरा किया। भारत और फ्रांस के बीच तेज़ी से परंपरागत संबंधों (रक्षा और अंतरिक्ष) से आगे बढ़कर दोनों देश अब उभरती प्रौद्योगिकियों (Emerging Technologies) को अपनी साझेदारी का नया आधार बना रहे हैं।
2026 की प्रमुख घटनाएँ और मंच
“भारत इनोवेट्स” कार्यक्रम — नीस (Nice) में उद्घाटन: दोनों देशों के स्टार्टअप और वेंचर कैपिटलिस्ट एक साथ
“विवाटेक समिट” — पेरिस में यूरोप का सबसे बड़ा स्टार्टअप शो, जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री की भागीदारी
“भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026” घोषित — कागज़ी समझौतों को ज़मीनी कार्यान्वयन में बदलने की प्रतिबद्धता
नोट: स्लोवाकिया दौरा (1993 में स्वतंत्रता के बाद पहली भारतीय पीएम यात्रा) — मध्य और पूर्वी यूरोप में भारत की बढ़ती राजनयिक पहुंच का संकेत
साझेदारी के नए और उभरते स्तंभ
फ्रांस की ताकत
भारत का योगदान
एयरोस्पेस और रोबोटिक्स
मितव्ययी नवाचार (Frugal Innovation)
हेल्थकेयर और यूरोपीय डिजिटल अर्थव्यवस्था का केंद्र
गतिशील स्टार्टअप इकोसिस्टम (वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा)
रणनीतिक और भू-राजनीतिक आयाम
क) रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु सहयोग
सह-डिजाइन और सह-उत्पादन: रक्षा प्लेटफार्मों के केवल आयात-निर्यात से आगे, संयुक्त डिजाइन और उत्पादन पर बल
अग्रणी तकनीक: छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs), संयुक्त उपग्रह विकास और “मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम” में तेज़ी
ख) त्रिपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग
अफ्रीका में अवसर: भारत और फ्रांस मिलकर अफ्रीकी विकास कार्यों को आगे बढ़ा सकते हैं (नोट: मई 2026 का भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन इबोला संकट के कारण स्थगित — त्रिपक्षीय सहयोग और प्रासंगिक)
वैश्विक संकटों पर साझा दृष्टिकोण: यूक्रेन और ईरान संघर्षों के कारण ग्लोबल साउथ पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभावों को कम करने की साझा कोशिश
ग) G-7 से D-10 की बहस
G-20 की गति धीमी होने के बाद, G-7 को D-10 (10 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों का समूह) में बदलने की चर्चाएँ तेज़ हैं। भारत एक आमंत्रित सदस्य के रूप में इस घटनाक्रम पर बारीक नज़र रखे हुए है — D-10 में शामिल होना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय उन्नयन होगा।
परीक्षोपयोगी प्रश्न“परंपरागत रक्षा सहयोग से इतर, प्रौद्योगिकी और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) वर्तमान में भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के नए चालक बनकर उभरे हैं।” कथन का परीक्षण कीजिए तथा वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता में इन दोनों देशों की “रणनीतिक स्वायत्तता” के महत्व पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
विषय 4: वैश्विक शरणार्थी संकट 2025 GS Paper 2 | अंतरराष्ट्रीय संबंध | मानवाधिकार | वैश्विक शासन | Non-Refoulement
चर्चा में क्यों? UNHCR की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों की संख्या में गिरावट आई है, लेकिन यह सुधार स्वैच्छिक नहीं है। मेजबान देशों के बढ़ते आर्थिक-राजनीतिक दबाव और कठोर नीतियों के कारण शरणार्थी असुरक्षित परिस्थितियों में भी अपने मूल देशों में लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
मुख्य सांख्यिकीय निष्कर्ष
संकेतक
आंकड़ा (2025)
वैश्विक शरणार्थी जनसंख्या
4.16 करोड़ (3% की मामूली गिरावट)
फिलिस्तीनी शरणार्थी
~60 लाख (15%) — चल रही भू-राजनीतिक अस्थिरता का संकेतक
अपने मूल देश लौटे लोग
~1.47 करोड़ — 1965 में UNHCR डेटा संग्रह शुरू होने के बाद दूसरी सबसे बड़ी वापसी
अफगान शरणार्थी — जबरन वापसी
~19.5 लाख अकेले 2025 में (ईरान और पाकिस्तान की कठोर नीतियों के कारण)
सर्वाधिक शरण आवेदन प्राप्त देश
अमेरिका (9 लाख से अधिक)
शरण चाहने वालों का मुख्य मूल देश
यूक्रेन
सबसे तेज़ नई संकट वृद्धि
वेनेजुएला (3% की सबसे तीव्र वृद्धि — शासन विफलता + आर्थिक संकट)
शरणार्थियों की वापसी: समाधान या मजबूरी?
स्वैच्छिक वापसी
जबरन / दबाव में वापसी
मूल देश में सुरक्षित परिस्थितियाँ सुनिश्चित
मूल देश अभी भी असुरक्षित हो सकता है
शरणार्थी की स्वतंत्र, सूचित पसंद
मेजबान देश की शत्रुतापूर्ण नीतियों के कारण प्रस्थान
अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप
Non-Refoulement सिद्धांत का संभावित उल्लंघन
UNHCR सुविधित, गरिमापूर्ण
अक्सर अपमानजनक, बिना पर्याप्त समर्थन के
“नॉन-रिफाउलमेंट” का सिद्धांत
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का एक बुनियादी सिद्धांत है — नॉन-रिफाउलमेंट। 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन के अनुच्छेद 33 के तहत किसी भी राज्य को किसी शरणार्थी को ऐसे देश में वापस भेजने से मना किया गया है जहाँ उसके जीवन या स्वतंत्रता को खतरा हो।
भारत 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है — लेकिन प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून और 1967 के प्रोटोकॉल के तहत दायित्व हैं
अफगान संकट का मामला: ईरान और पाकिस्तान की 2025 की प्रतिबंधात्मक नीतियों के तहत 19.5 लाख अफगान तालिबान शासित अफगानिस्तान लौटे — जहाँ मानवाधिकार स्थिति अभी भी गंभीर है — यह non-refoulement की गंभीर चिंता है
परीक्षोपयोगी प्रश्न“वैश्विक शरणार्थी संकट के समाधान के रूप में शरणार्थियों की उनके मूल देश में वापसी हमेशा स्वैच्छिक या सुरक्षित नहीं होती है, बल्कि यह अक्सर मेजबान देशों की प्रतिबंधात्मक नीतियों का परिणाम होती है।” UNHCR की हालिया रिपोर्ट के आलोक में इस कथन की समीक्षा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
विषय 5: ड्रोन क्रांति और आधुनिक युद्ध का बदलता स्वरूप GS Paper 3 | रक्षा प्रौद्योगिकी | आंतरिक सुरक्षा | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी | असममित युद्ध
चर्चा में क्यों? यूक्रेन, लेबनान और पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) के समकालीन संघर्षों ने यह सिद्ध कर दिया है कि ड्रोन सहायक उपकरणों से विकसित होकर सैन्य अभियानों के केंद्रीय बुनियादी ढांचे बन गए हैं। सस्ते और व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ड्रोन ने असममित युद्ध का “लोकतंत्रीकरण” कर दिया है — छोटे देशों और गैर-राजकीय संगठनों को बड़ी महाशक्तियों के बराबर मारक क्षमता दे दी है।
ड्रोन ने युद्ध को कैसे बदला: मुख्य परिवर्तन
परंपरागत युद्ध
ड्रोन युद्ध की नई अर्थव्यवस्था
सैन्य शक्ति = महंगे हाई-एंड प्लेटफार्म
सैन्य शक्ति तेज़ी से ड्रोन उत्पादन मात्रा और नवाचार क्षमता से मापी जाती है
छोटी सेनाओं की सीमित क्षमता
₹42,000 का FPV ड्रोन ($500) करोड़ों का टैंक नष्ट कर सकता है
रणनीतिक अदृश्यता संभव थी
“निरंतर दृश्यता का युद्धक्षेत्र” — UAS से सभी गतिविधियाँ दृश्यमान; “पकड़े जाने का सीधा अर्थ है — तत्काल विनाश”
तकनीकी श्रेष्ठता = रक्षा
तकनीकी समानता गैर-राजकीय संगठनों और छोटी अर्थव्यवस्थाओं द्वारा प्राप्य
“यूक्रेन मॉडल”: औद्योगिक पैमाने का ड्रोन युद्ध
क) FPV क्रांति
मूल रूप से रेसिंग और फोटोग्राफी के लिए बने कुछ सौ डॉलर के नागरिक ड्रोनों को री-इंजीनियर करके सटीक-निर्देशित मिसाइलों (Kamikaze/Suicide Drones) में बदल दिया गया।
ख) तकनीकी नवाचार के प्रमुख उदाहरण
तकनीक
विवरण और महत्व
बाबा यागा (Vampire Drone)
यूक्रेन द्वारा उपयोग किया जाने वाला भारी-भरकम हेक्साकॉप्टर — रात में घातक बमबारी में सक्षम
लोइटरिंग मुनिशन्स (Loitering Munitions)
RAM II, UJ-31 ज़ोज़ुल्या — हवा में तैरते हुए इष्टतम समय पर हमला करने वाले “पैरासाइट ड्रोन”
फाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन (EW प्रतिरोधी)
इस युद्ध का सबसे बड़ा नवाचार — अत्यंत महीन फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए निर्देशित; इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) जैमिंग से पूरी तरह सुरक्षित
AI-सक्षम काउंटर-ड्रोन सिस्टम
इज़राइल का “आयरन ड्रोन रेडर” — आने वाले ड्रोनों को जाल (Net) में फंसाकर या सीधे टक्कर मारकर नष्ट करता है — महंगी मिसाइलों की जगह
पश्चिम एशिया का ड्रोन नेटवर्क और हाइब्रिड मॉडल
हिज़बुल्लाह का स्तरित ढांचा: ईरान से आपूर्ति की गई प्रणालियों (अबाबिल, मोहजर-4, शाहेद-129, 136) पर पूरी तरह निर्भर; हाल ही में इज़राइली जैमिंग से बचने के लिए फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन अपनाए
इज़राइल की काउंटर-ड्रोन रणनीति: “आयरन ड्रोन रेडर” — AI-सक्षम प्रणाली जो आने वाले ड्रोन को जाल में फँसाकर या सीधे टक्कर मारकर लागत-प्रभावी तरीके से नष्ट करती है
ईरान का “प्रॉक्सी और प्रतिरोध” मॉडल: IRGC ड्रोन को युद्धक्षेत्र के हथियार के रूप में नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक दबाव और “डेटरेंस” के औज़ार के रूप में देखता है — इराक, सीरिया और यमन (हूती) के नेटवर्क के माध्यम से पूरे मध्य पूर्व में नौसैनिक मार्गों और बुनियादी ढांचे को रणनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है
भारत के लिए सबक
भारत के समक्ष सुरक्षा चुनौती
आवश्यक रणनीतिक प्रतिक्रिया
सीमाओं पर बढ़ते ड्रोन खतरे (हथियार/नशीले पदार्थ तस्करी)
DPEPP 2020 के तहत स्वदेशी, कम लागत के लोइटरिंग मुनिशन्स और FPV ड्रोन का बड़े पैमाने पर उत्पादन
वर्तमान ड्रोन बेड़े की EW संवेदनशीलता
फाइबर-ऑप्टिक निर्देशित ड्रोन प्रौद्योगिकी और AI-स्वायत्त प्रणालियों में निवेश जो GPS/मानव नियंत्रण पर निर्भर न हों
गैर-राजकीय संगठन खतरे का प्रसार
iDEX (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सेलेंस) — काउंटर-ड्रोन स्टार्टअप और स्वार्म डिफेंस तकनीक को प्रोत्साहन
प्रमुख शब्दावली
शब्द
परिभाषा
FPV ड्रोन (First-Person View)
फर्स्ट-पर्सन कैमरा फीड से नियंत्रित छोटा ड्रोन — यूक्रेन में सटीक-निर्देशित कामिकाज़े हथियार के रूप में पुनर्रचित
लोइटरिंग मुनिशन
लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर लंबे समय तक मँडराने वाला ड्रोन जो इष्टतम समय पर हमला करता है
असममित युद्ध (Asymmetric Warfare)
बहुत अलग-अलग सैन्य क्षमताओं वाले पक्षों के बीच संघर्ष — ड्रोन ने इसके लिए क्षमता सीमा को नाटकीय रूप से कम किया
C-UAS
Counter-Unmanned Aerial Systems — दुश्मन ड्रोन का पता लगाने, ट्रैक करने और नष्ट करने की तकनीकों का समूह
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW)
दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों को जाम करने, धोखा देने या नष्ट करने के लिए विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम का उपयोग
फाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन
अत्यंत महीन फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए निर्देशित ड्रोन — रेडियो सिग्नल का उपयोग नहीं करता, EW जैमिंग से पूरी तरह सुरक्षित
परीक्षोपयोगी प्रश्न“यूक्रेन और पश्चिम एशिया के हालिया संघर्षों ने यह सिद्ध कर दिया है कि आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन अब केवल सहायक उपकरण नहीं, बल्कि युद्ध के बुनियादी ढाँचे बन गए हैं।” इस कथन के आलोक में समकालीन युद्ध के बदलते अर्थशास्त्र का विश्लेषण कीजिए तथा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों की समीक्षा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
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